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ramayan 3.71.32: हे महावीर रघुनन्दन! जब आप मेरे शरीर का विधिपूर्वक दाह कर देंगे, तब मैं आपको ऐसे महापुरुष से मिलवाऊँगा जो उस राक्षस के विषय में जान सकेगा॥ 32॥   |   ramayan सर्ग 3.71: कबन्ध की आत्मकथा, अपने शरीर का दाह हो जाने पर उसका श्रीराम को सीता के अन्वेषण में सहायता देने का आश्वासन   ।   ramayan काण्ड 3: अरण्य काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  3.71.32 
दग्धस्त्वयाहमवटे न्यायेन रघुनन्दन।
वक्ष्यामि तं महावीर यस्तं वेत्स्यति राक्षसम्॥ ३२॥
 
 
अनुवाद
हे महावीर रघुनन्दन! जब आप मेरे शरीर का विधिपूर्वक दाह कर देंगे, तब मैं आपको ऐसे महापुरुष से मिलवाऊँगा जो उस राक्षस के विषय में जान सकेगा॥ 32॥
 
O Mahavira Raghunandan! After you cremate my body in a proper manner, I will introduce you to such a great man who might know about that demon.॥ 32॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)