श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 3: अरण्य काण्ड  »  सर्ग 70: श्रीराम और लक्ष्मण का परस्पर विचार करके कबन्ध की दोनों भुजाओं को काट डालना तथा कबन्ध के द्वारा उनका स्वागत  »  श्लोक 12
 
 
श्लोक  3.70.12 
इति तस्य ब्रुवाणस्य लक्ष्मण: शुभलक्षण:।
शशंस तस्य काकुस्त्थं कबन्धस्य महाबल:॥ १२॥
 
 
अनुवाद
कबन्ध को इस प्रकार पूछते सुनकर शुभ लक्षणों से युक्त महाबली लक्ष्मण उसे श्री रामचन्द्रजी से परिचित कराने लगे-॥12॥
 
On hearing Kabandha ask in this manner, the mighty Lakshmana, endowed with auspicious characteristics, began to introduce him to Sri Ramachandraji -॥ 12॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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