श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 3: अरण्य काण्ड  »  सर्ग 70: श्रीराम और लक्ष्मण का परस्पर विचार करके कबन्ध की दोनों भुजाओं को काट डालना तथा कबन्ध के द्वारा उनका स्वागत  »  श्लोक 11
 
 
श्लोक  3.70.11 
स निकृत्तौ भुजौ दृष्ट्वा शोणितौघपरिप्लुत:।
दीन: पप्रच्छ तौ वीरौ कौ युवामिति दानव:॥ ११॥
 
 
अनुवाद
अपनी भुजाएँ कटी हुई और रक्त से लथपथ देखकर राक्षस ने करुण वाणी में पूछा, "वीरों! तुम दोनों कौन हो?"॥11॥
 
Seeing his arms chopped off and soaked in blood the demon asked in a pitiful voice, "Heroes! Who are you two?"॥ 11॥
 ✨ ai-generated
 
 
  Connect Form
  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
  © 2026 vedamrit.in All Rights Reserved. Developed by acd