Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
ramayan 3.7.24: जब संध्या समय व्यतीत हो गया और रात्रि हो गई, तब महात्मा सुतीक्ष्ण स्वयं तपस्वियों के खाने योग्य शुभ भोजन लेकर आए और उन दोनों पुरुषमुखधारी भाइयों को बड़े आदर के साथ भोजन कराया॥24॥   |   ramayan सर्ग 3.7: सीता और भ्राता सहित श्रीराम का सुतीक्ष्ण के आश्रम पर जाकर उनसे बातचीत करना तथा उनसे सत्कृत हो रात में वहीं ठहरना   ।   ramayan काण्ड 3: अरण्य काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 3: अरण्य काण्ड  »  सर्ग 7: सीता और भ्राता सहित श्रीराम का सुतीक्ष्ण के आश्रम पर जाकर उनसे बातचीत करना तथा उनसे सत्कृत हो रात में वहीं ठहरना  »  श्लोक 24
 
 
श्लोक  3.7.24 
तत: शुभं तापसयोग्यमन्नं
स्वयं सुतीक्ष्ण: पुरुषर्षभाभ्याम्।
ताभ्यां सुसत्कृत्य ददौ महात्मा
संध्यानिवृत्तौ रजनीं समीक्ष्य ॥ २ ४॥
 
 
अनुवाद
जब संध्या समय व्यतीत हो गया और रात्रि हो गई, तब महात्मा सुतीक्ष्ण स्वयं तपस्वियों के खाने योग्य शुभ भोजन लेकर आए और उन दोनों पुरुषमुखधारी भाइयों को बड़े आदर के साथ भोजन कराया॥24॥
 
When the evening time passed and it became night, Mahatma Sutikshna himself brought auspicious food suitable for the ascetics to consume and offered it to those two male-headed brothers with great respect. 24॥
 
इत्यार्षे श्रीमद्रामायणे वाल्मीकीये आदिकाव्येऽरण्यकाण्डे सप्तम: सर्ग:॥ ७॥
इस प्रकार श्रीवाल्मीकिनिर्मित आर्षरामायण आदिकाव्यके अरण्यकाण्डमें सातवाँ सर्ग पूरा हुआ॥ ७॥
 
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)