श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 3: अरण्य काण्ड  »  सर्ग 7: सीता और भ्राता सहित श्रीराम का सुतीक्ष्ण के आश्रम पर जाकर उनसे बातचीत करना तथा उनसे सत्कृत हो रात में वहीं ठहरना  »  श्लोक 16
 
 
श्लोक  3.7.16 
एवमुक्तस्तु रामेण महर्षिर्लोकविश्रुत:।
अब्रवीन्मधुरं वाक्यं हर्षेण महता युत:॥ १६॥
 
 
अनुवाद
जब श्री रामचन्द्रजी ने ऐसा कहा, तब प्रसिद्ध मुनि ने बड़े हर्ष के साथ मधुर वाणी में कहा-॥16॥
 
When Shri Ramchandraji said this, the renowned sage said in sweet voice with great joy -॥ 16॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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