श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 3: अरण्य काण्ड  »  सर्ग 69: लक्ष्मण का अयोमुखी को दण्ड देना तथा श्रीराम और लक्ष्मण का कबन्ध के बाहुबन्ध में पड़कर चिन्तित होना  »  श्लोक 24
 
 
श्लोक  3.69.24 
तयोरन्वेषतोरेवं सर्वं तद् वनमोजसा।
संजज्ञे विपुल: शब्द: प्रभञ्जन्निव तद् वनम्॥ २४॥
 
 
अनुवाद
जब दोनों भाई इस प्रकार वन में सीता को खोज रहे थे, तब एक बड़ी भयंकर ध्वनि सुनाई दी, जिससे ऐसा प्रतीत हुआ मानो वन का विनाश हो रहा हो ॥24॥
 
While the two brothers were searching for Sita in this manner throughout the forest, a loud noise was heard which seemed as if the forest was being destroyed. ॥24॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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