श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 3: अरण्य काण्ड  »  सर्ग 69: लक्ष्मण का अयोमुखी को दण्ड देना तथा श्रीराम और लक्ष्मण का कबन्ध के बाहुबन्ध में पड़कर चिन्तित होना  »  श्लोक 17
 
 
श्लोक  3.69.17 
एवमुक्तस्तु कुपित: खड्गमुद‍्धृत्य लक्ष्मण:।
कर्णनासस्तनं तस्या निचकर्तारिसूदन:॥ १७॥
 
 
अनुवाद
राक्षसी के ऐसा कहने पर शत्रुघ्न लक्ष्मण क्रोध से भर गए और उन्होंने अपनी तलवार निकालकर उसके कान, नाक और स्तन काट डाले॥17॥
 
When the demoness said this, Shatrughan Lakshmana was filled with anger. He took out his sword and cut off her ears, nose and breasts.॥ 17॥
 ✨ ai-generated
 
 
  Connect Form
  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
  © 2026 vedamrit.in All Rights Reserved. Developed by acd