श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 3: अरण्य काण्ड  »  सर्ग 69: लक्ष्मण का अयोमुखी को दण्ड देना तथा श्रीराम और लक्ष्मण का कबन्ध के बाहुबन्ध में पड़कर चिन्तित होना  »  श्लोक 1
 
 
श्लोक  3.69.1 
कृत्वैवमुदकं तस्मै प्रस्थितौ राघवौ तदा।
अवेक्षन्तौ वने सीतां जग्मतु: पश्चिमां दिशम् ॥ १ ॥
 
 
अनुवाद
इस प्रकार जटायु के लिए जल दान करके दोनों रघुवंशी भाई वहाँ से चले गए और वन में सीता की खोज में पश्चिम दिशा (उत्तर-पश्चिम कोने) की ओर चले गए॥1॥
 
In this way, after donating water for Jatayu, both Raghuvanshi brothers left from there and went towards the west (north-west corner) in search of Sita in the forest. 1॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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