श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 3: अरण्य काण्ड  »  सर्ग 68: जटायु का प्राण-त्याग और श्रीराम द्वारा उनका दाह-संस्कार  »  श्लोक 4
 
 
श्लोक  3.68.4 
जटायो यदि शक्नोषि वाक्यं व्याहरितुं पुन:।
सीतामाख्याहि भद्रं ते वधमाख्याहि चात्मन:॥ ४॥
 
 
अनुवाद
(लक्ष्मण से ऐसा कहकर श्री राम ने पक्षी से कहा -) 'जटायो! यदि तुम पुनः बोल सको, तो तुम्हारा कल्याण होगा। बताओ, सीता का क्या हाल है? और तुम कैसे मारे गए?॥4॥
 
(Having said this to Lakshmana, Shri Ram said to the bird -) 'Jatayo! If you can speak again, it will be good for you. Tell me, what is the condition of Sita? And how were you killed?॥ 4॥
 ✨ ai-generated
 
 
  Connect Form
  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
  © 2026 vedamrit.in All Rights Reserved. Developed by acd