vedamrit
Reset
Home
प्रमुख ग्रंथ
भगवद गीता
श्रीमद् रामायण
श्रीमद् भागवतम
श्री महाभारत
श्री रामचरितमानस
श्रीमद् विष्णु पुराण
श्रीचैतन्य भागवत
श्रीचैतन्य चरितामृत
भक्तिरसामृतसिन्धु
वैष्णव भजन, इस्कॉन आरती
Articles
Apps
About
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण
»
काण्ड 3: अरण्य काण्ड
»
सर्ग 68: जटायु का प्राण-त्याग और श्रीराम द्वारा उनका दाह-संस्कार
»
श्लोक 26
श्लोक
3.68.26
राजा दशरथ: श्रीमान् यथा मम महायशा:।
पूजनीयश्च मान्यश्च तथायं पतगेश्वर:॥ २६॥
अनुवाद
‘जैसे यशस्वी एवं पूजनीय राजा दशरथ मेरे लिए आदरणीय एवं पूजनीय थे, वैसे ही यह पक्षीराज जटायु भी मेरे लिए आदरणीय एवं पूजनीय है।॥26॥
‘Just as the illustrious and revered King Dasharatha was respected and revered by me, so is this bird king Jatayu.॥ 26॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
© 2023 vedamrit.in - All Rights Reserved. Developed by ACd
Download SongBook App
Install
×