श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 3: अरण्य काण्ड  »  सर्ग 68: जटायु का प्राण-त्याग और श्रीराम द्वारा उनका दाह-संस्कार  »  श्लोक 26
 
 
श्लोक  3.68.26 
राजा दशरथ: श्रीमान् यथा मम महायशा:।
पूजनीयश्च मान्यश्च तथायं पतगेश्वर:॥ २६॥
 
 
अनुवाद
‘जैसे यशस्वी एवं पूजनीय राजा दशरथ मेरे लिए आदरणीय एवं पूजनीय थे, वैसे ही यह पक्षीराज जटायु भी मेरे लिए आदरणीय एवं पूजनीय है।॥26॥
 
‘Just as the illustrious and revered King Dasharatha was respected and revered by me, so is this bird king Jatayu.॥ 26॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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