श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 3: अरण्य काण्ड  »  सर्ग 68: जटायु का प्राण-त्याग और श्रीराम द्वारा उनका दाह-संस्कार  »  श्लोक 23
 
 
श्लोक  3.68.23 
गृध्रराज्यं परित्यज्य पितृपैतामहं महत्।
मम हेतोरयं प्राणान् मुमोच पतगेश्वर:॥ २३॥
 
 
अनुवाद
‘अपने पूर्वजों से प्राप्त हुए विशाल गिद्धों के राज्य को त्यागकर इस पक्षीराज ने मेरे लिए अपने प्राण त्याग दिए हैं।॥ 23॥
 
‘Abandoning the vast kingdom of the vultures which they had received from their forefathers, this king of birds has sacrificed his life for me.॥ 23॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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