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श्लोक 9
श्लोक
3.66.9
महर्षिर्यो वसिष्ठस्तु य: पितुर्न: पुरोहित:।
अह्ना पुत्रशतं जज्ञे तथैवास्य पुनर्हतम्॥ ९॥
अनुवाद
हमारे पिता के पुरोहित महर्षि वशिष्ठ को एक ही दिन में सौ पुत्र प्राप्त हुए और फिर उसी दिन विश्वामित्र ने उन सभी को मार डाला।
Our father's priest, Maharishi Vasishtha, got a hundred sons in a single day and then on the same day all of them were killed by Vishwamitra.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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