श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 3: अरण्य काण्ड  »  सर्ग 65: लक्ष्मण का श्रीराम को समझा-बुझाकर शान्त करना  »  श्लोक 6
 
 
श्लोक  3.65.6 
एकस्य नापराधेन लोकान् हन्तुं त्वमर्हसि।
ननु जानामि कस्यायं भग्न: सांग्रामिको रथ:॥ ६॥
 
 
अनुवाद
'कृपया एक व्यक्ति के अपराध के कारण सम्पूर्ण विश्व का विनाश न करें। मैं यह पता लगाने का प्रयास कर रहा हूँ कि यह टूटा हुआ रथ किसका है।'
 
‘Please do not destroy the entire world because of the crime of one person. I am trying to find out whose broken chariot is this.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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