श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 3: अरण्य काण्ड  »  सर्ग 65: लक्ष्मण का श्रीराम को समझा-बुझाकर शान्त करना  »  श्लोक 10
 
 
श्लोक  3.65.10 
युक्तदण्डा हि मृदव: प्रशान्ता वसुधाधिपा:।
सदा त्वं सर्वभूतानां शरण्य: परमा गति:॥ १०॥
 
 
अनुवाद
‘क्योंकि राजा लोग सौम्य और शान्त स्वभाव के होते हैं, जो अपराध के अनुसार उचित दण्ड देते हैं। आप सदैव समस्त प्राणियों के आश्रय हैं और उनके परम मोक्ष हैं।॥10॥
 
‘Because kings are gentle and calm, who give appropriate punishment according to the crime. You are always the refuge of all living beings and are their ultimate salvation.॥10॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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