vedamrit
Reset
Home
ग्रन्थ
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण
श्रीमद् भगवद गीता
______________
श्री विष्णु पुराण
श्रीमद् भागवतम
______________
श्रीचैतन्य भागवत
वैष्णव भजन
About
Contact
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण
»
काण्ड 3: अरण्य काण्ड
»
सर्ग 64: श्रीराम और लक्ष्मण के द्वारा सीता की खोज, आभूषणों के कण और युद्ध के चिह्न देखकर श्रीराम का देवता आदि सहित समस्त त्रिलोकी पर रोष प्रकट करना
»
श्लोक 9
श्लोक
3.64.9
रावणस्य च तद्रूपं कर्मापि च दुरात्मन:।
ध्यात्वा भयात् तु वैदेहीं सा नदी न शशंस ह॥ ९॥
अनुवाद
उस दुष्टबुद्धि रावण के रूप और कर्मों को स्मरण करके गोदावरी नदी ने भय के मारे वैदेही के विषय में श्री राम से कुछ नहीं कहा॥9॥
Remembering the form and deeds of that evil-minded Ravana, the river Godavari, out of fear, did not say anything to Sri Rama about Vaidehi.॥ 9॥
✨ ai-generated
Connect Form
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
© 2026 vedamrit.in All Rights Reserved. Developed by acd