श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 3: अरण्य काण्ड  »  सर्ग 64: श्रीराम और लक्ष्मण के द्वारा सीता की खोज, आभूषणों के कण और युद्ध के चिह्न देखकर श्रीराम का देवता आदि सहित समस्त त्रिलोकी पर रोष प्रकट करना  »  श्लोक 43
 
 
श्लोक  3.64.43 
मुक्तामणिचितं चेदं रमणीयं विभूषितम्।
धरण्यां पतितं सौम्य कस्य भग्नं महद् धनु:॥ ४३॥
 
 
अनुवाद
सौम्य! इसीलिए यह अत्यंत सुंदर और विशाल, मोतियों और मणियों से जड़ा हुआ तथा रत्नों से विभूषित धनुष पृथ्वी पर टूटा पड़ा है। यह धनुष किसका हो सकता है?॥ 43॥
 
'Soumya! That is why this very beautiful and huge bow, studded with pearls and gems and decorated with gems, is lying broken on the earth. Whose bow could this be?॥ 43॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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