श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 3: अरण्य काण्ड  »  सर्ग 64: श्रीराम और लक्ष्मण के द्वारा सीता की खोज, आभूषणों के कण और युद्ध के चिह्न देखकर श्रीराम का देवता आदि सहित समस्त त्रिलोकी पर रोष प्रकट करना  »  श्लोक 28-29h
 
 
श्लोक  3.64.28-29h 
एवमुक्त्वा महाबाहुर्लक्ष्मणं पुरुषर्षभम्॥ २८॥
उवाच रामो धर्मात्मा गिरिं प्रस्रवणाकुलम्।
 
 
अनुवाद
पुरुषार्थी लक्ष्मण से ऐसा कहकर धर्मात्मा और महाबाहु श्री राम ने झरनों से भरे हुए बहते हुए झरनों से कहा- ॥28 1/2॥
 
Having said this to the manly man Lakshmana, the virtuous and mighty-armed Shri Ram said to the flowing falls filled with springs – ॥ 28 1/2॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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