श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 3: अरण्य काण्ड  »  सर्ग 64: श्रीराम और लक्ष्मण के द्वारा सीता की खोज, आभूषणों के कण और युद्ध के चिह्न देखकर श्रीराम का देवता आदि सहित समस्त त्रिलोकी पर रोष प्रकट करना  »  श्लोक 26-27h
 
 
श्लोक  3.64.26-27h 
अभिजानामि पुष्पाणि तानीमानीह लक्ष्मण॥ २६॥
अपिनद्धानि वैदेह्या मया दत्तानि कानने।
 
 
अनुवाद
'लक्ष्मण! मैं इन पुष्पों को पहचानता हूँ। ये वही पुष्प हैं जो यहाँ गिरे हैं, जिन्हें मैंने वन में विदेहनन्दिनी को दिया था और उन्होंने इन्हें अपने केशों में लगा लिया था॥26 1/2॥
 
'Lakshman! I recognize these flowers. These are the same flowers that have fallen here, which I had given to Videhanandini in the forest and she had put them in her hair.॥ 26 1/2॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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