श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 3: अरण्य काण्ड  »  सर्ग 64: श्रीराम और लक्ष्मण के द्वारा सीता की खोज, आभूषणों के कण और युद्ध के चिह्न देखकर श्रीराम का देवता आदि सहित समस्त त्रिलोकी पर रोष प्रकट करना  »  श्लोक 19-20
 
 
श्लोक  3.64.19-20 
येन मार्गं च भूमिं च निरीक्षन्ते स्म ते मृगा:॥ १९॥
पुनर्नदन्तो गच्छन्ति लक्ष्मणेनोपलक्षिता:।
तेषां वचनसर्वस्वं लक्षयामास चेङ्गितम्॥ २०॥
 
 
अनुवाद
वे मृग आकाश और भूमि दोनों ओर देखकर गर्जना करते हुए पुनः आगे बढ़े। लक्ष्मण ने उनका भाव समझ लिया। वे जो कहना चाहते थे उसका सार वे भली-भाँति समझ गए॥19-20॥
 
Those deer looked both in the sky and on the ground and roared as they moved ahead again. Lakshmana noticed their gesture. He understood very well the gist of what they wanted to say.॥19-20॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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