श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 3: अरण्य काण्ड  »  सर्ग 64: श्रीराम और लक्ष्मण के द्वारा सीता की खोज, आभूषणों के कण और युद्ध के चिह्न देखकर श्रीराम का देवता आदि सहित समस्त त्रिलोकी पर रोष प्रकट करना  »  श्लोक 15-16h
 
 
श्लोक  3.64.15-16h 
एते महामृगा वीर मामीक्षन्ते पुन: पुन:॥ १५॥
वक्तुकामा इह हि मे इङ्गितान्युपलक्षये।
 
 
अनुवाद
‘वीर लक्ष्मण! ये विशाल मृग बार-बार मेरी ओर देख रहे हैं, मानो मुझसे कुछ कहना चाहते हों। मैं उनके भाव समझ सकता हूँ।’॥15 1/2॥
 
‘Valiant Lakshman! These huge deer are looking at me again and again, as if they want to tell me something. I can understand their gestures.’॥ 15 1/2॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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