|
| |
| |
श्लोक 3.63.4  |
पूर्वं मया नूनमभीप्सितानि
पापानि कर्माण्यसकृत्कृतानि।
तत्रायमद्यापतितो विपाको
दु:खेन दु:खं यदहं विशामि॥ ४॥ |
| |
| |
| अनुवाद |
| ‘निश्चय ही मैंने पूर्वजन्मों में अपनी इच्छा के अनुसार बार-बार अनेक पापकर्म किए हैं; उनमें से कुछ कर्मों का फल आज मुझे मिला है, जिसके कारण मैं एक दुःख से दूसरे दुःख में गिर रहा हूँ॥4॥ |
| |
| ‘Surely in my previous lives I have repeatedly committed many sinful acts according to my wishes; the result of some of those acts has come to me today, due to which I am falling from one suffering to another.॥ 4॥ |
| ✨ ai-generated |
| |
|