श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 3: अरण्य काण्ड  »  सर्ग 63: श्रीराम का विलाप  »  श्लोक 19
 
 
श्लोक  3.63.19 
शोकं विसृज्याद्य धृतिं भजस्व
सोत्साहता चास्तु विमार्गणेऽस्या:।
उत्साहवन्तो हि नरा न लोके
सीदन्ति कर्मस्वतिदुष्करेषु॥ १९॥
 
 
अनुवाद
आर्य! शोक छोड़कर धैर्य रखो; सीता की खोज के लिए अपने हृदय में उत्साह रखो; क्योंकि उत्साही पुरुष संसार में अत्यन्त कठिन कार्य होने पर भी कभी दुःखी नहीं होते॥19॥
 
'Arya! Leave aside your grief and be patient; keep enthusiasm in your heart to search for Sita; because enthusiastic people never become sad even when faced with extremely difficult tasks in the world.'॥ 19॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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