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श्लोक 3.63.16  |
आदित्य भो लोककृताकृतज्ञ
लोकस्य सत्यानृतकर्मसाक्षिन्।
मम प्रिया सा क्व गता हृता वा
शंसस्व मे शोकहतस्य सर्वम्॥ १६॥ |
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| अनुवाद |
| 'सूर्यदेव! आप इस संसार में किसने क्या किया और किसने क्या नहीं किया, यह सब जानते हैं; आप मनुष्यों के सत्य-असत्य (पुण्य-पाप) कर्मों के साक्षी हैं। मुझे बताइए कि मेरी प्रिय सीता कहाँ गई है अथवा उसका हरण किसने किया है; क्योंकि मैं उसके दुःख से पीड़ित हूँ॥ 16॥ |
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| 'Sun God! You know who did what and who did not do in this world; you are the witness of the true and false (virtuous and sinful) deeds of people. Tell me where my beloved Sita has gone or who has abducted her; because I am suffering from her grief.॥ 16॥ |
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