श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 3: अरण्य काण्ड  »  सर्ग 63: श्रीराम का विलाप  »  श्लोक 16
 
 
श्लोक  3.63.16 
आदित्य भो लोककृताकृतज्ञ
लोकस्य सत्यानृतकर्मसाक्षिन्।
मम प्रिया सा क्व गता हृता वा
शंसस्व मे शोकहतस्य सर्वम्॥ १६॥
 
 
अनुवाद
'सूर्यदेव! आप इस संसार में किसने क्या किया और किसने क्या नहीं किया, यह सब जानते हैं; आप मनुष्यों के सत्य-असत्य (पुण्य-पाप) कर्मों के साक्षी हैं। मुझे बताइए कि मेरी प्रिय सीता कहाँ गई है अथवा उसका हरण किसने किया है; क्योंकि मैं उसके दुःख से पीड़ित हूँ॥ 16॥
 
'Sun God! You know who did what and who did not do in this world; you are the witness of the true and false (virtuous and sinful) deeds of people. Tell me where my beloved Sita has gone or who has abducted her; because I am suffering from her grief.॥ 16॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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