श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 3: अरण्य काण्ड  »  सर्ग 63: श्रीराम का विलाप  »  श्लोक 14
 
 
श्लोक  3.63.14 
पद्मानना पद्मपलाशनेत्रा
पद्मानि वानेतुमभिप्रयाता।
तदप्ययुक्तं नहि सा कदाचि-
न्मया विना गच्छति पङ्कजानि॥ १४॥
 
 
अनुवाद
'उसका मुख और विशाल नेत्र खिले हुए कमलों के समान सुन्दर हैं। सम्भव है कि वह कमल-पुष्प लेने गोदावरी के तट पर गई हो, किन्तु यह भी सत्य नहीं है; क्योंकि वह मुझे साथ लिए बिना कमलों के पास कभी नहीं जाती थी॥14॥
 
'Her face and large eyes are as beautiful as blooming lotuses. It is possible that she went to the banks of the Godavari to collect lotus flowers, but this is also not correct; because she never went to the lotuses without taking me along.॥ 14॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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