| श्रीमद् वाल्मीकि रामायण » काण्ड 3: अरण्य काण्ड » सर्ग 63: श्रीराम का विलाप » श्लोक 1 |
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| | | | श्लोक 3.63.1  | स राजपुत्र: प्रियया विहीन:
शोकेन मोहेन च पीडॺमान:।
विषादयन् भ्रातरमार्तरूपो
भूयो विषादं प्रविवेश तीव्रम्॥ १॥ | | | | | | अनुवाद | | अपनी प्रियतमा सीता के वियोग में राजकुमार श्री राम शोक और मोह से पीड़ित होने लगे। वे स्वयं तो दुःखी थे ही, अपने भाई लक्ष्मण को भी शोक में डालकर पुनः घोर शोक में डूब गए॥1॥ | | | | Being separated from his beloved Sita, Prince Shri Ram began to suffer from grief and attachment. He himself was already suffering and putting his brother Lakshmana also in grief, he again became immersed in intense grief.॥1॥ | | ✨ ai-generated | | |
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