Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 ramayan 3.62.7-8h: (तब भ्रम दूर होने पर उन्होंने सुमित्रापुत्र से कहा -) 'लक्ष्मण! अब तो यह स्पष्ट हो गया है कि राक्षसों ने सीता को खा लिया है अथवा उनका हरण कर लिया है; क्योंकि मैं विलाप कर रहा हूँ और वह मेरे पास नहीं आ रही हैं।' | ramayan सर्ग 3.62: श्रीराम का विलाप । ramayan काण्ड 3: अरण्य काण्ड । श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
सुव्यक्तं राक्षसै: सीता भक्षिता वा हृतापि वा॥ ७॥
न हि सा विलपन्तं मामुपसम्प्रैति लक्ष्मण।
अनुवाद
(तब भ्रम दूर होने पर उन्होंने सुमित्रापुत्र से कहा -) 'लक्ष्मण! अब तो यह स्पष्ट हो गया है कि राक्षसों ने सीता को खा लिया है अथवा उनका हरण कर लिया है; क्योंकि मैं विलाप कर रहा हूँ और वह मेरे पास नहीं आ रही हैं।'
(Then after the confusion was cleared, he said to Sumitra's son -) 'Lakshman! Now it is very clear that the demons have either eaten up Sita or have abducted her; because I am lamenting and she is not coming to me. 7 1/2.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥