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श्लोक 3.61.8-9h  |
कामवृत्तमनार्यं वा मृषावादिनमेव च॥ ८॥
धिक् त्वामिति परे लोके व्यक्तं वक्ष्यति मे पिता। |
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| अनुवाद |
| ‘तुम्हारे समान स्वेच्छाचारी, असभ्य और मिथ्याचारी लोगों को धिक्कार है। परलोक में मेरे पिता मुझे यह बात अवश्य बताएँगे।’॥8 1/2॥ |
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| ‘Shame on those who are self-willed, uncivilized and liar like you. My father will surely tell me this in the next world.’॥ 8 1/2॥ |
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