श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 3: अरण्य काण्ड  »  सर्ग 61: श्रीराम और लक्ष्मण के द्वारा सीता की खोज और उनके न मिलने से श्रीराम की व्याकुलता  »  श्लोक 7-8h
 
 
श्लोक  3.61.7-8h 
कथं प्रतिज्ञां संश्रुत्य मया त्वमभियोजित:॥ ७॥
अपूरयित्वा तं कालं मत्सकाशमिहागत:।
 
 
अनुवाद
वह मुझे डाँटकर कहेगा कि, 'मैंने तुझे वन में जाने की आज्ञा दी थी और तूने वहीं रहने की प्रतिज्ञा भी की थी। फिर तू वहाँ इतने समय तक न रहकर और उस प्रतिज्ञा को पूरा किए बिना मेरे पास कैसे आ गया?॥7 1/2॥
 
He will rebuke me and say, 'I had ordered you to go to the forest and you had also pledged to stay there. Then how did you come here to me without staying there for that long and without fulfilling that pledge?॥ 7 1/2॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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