श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 3: अरण्य काण्ड  »  सर्ग 6: वानप्रस्थ मुनियों का राक्षसों के अत्याचार से अपनी रक्षा के लिये श्रीरामचन्द्रजी से प्रार्थना करना और श्रीराम का उन्हें आश्वासन दे  »  श्लोक 8
 
 
श्लोक  3.6.8 
त्वमिक्ष्वाकुकुलस्यास्य पृथिव्याश्च महारथ:।
प्रधानश्चापि नाथश्च देवानां मघवानिव॥ ८॥
 
 
अनुवाद
'रघुनन्दन! आप इस इक्ष्वाकुवंश के तथा सम्पूर्ण जगत के स्वामी, रक्षक और प्रधान योद्धा हैं। जैसे इन्द्र देवताओं के रक्षक हैं, वैसे ही आप मनुष्य जगत के भी रक्षक हैं।॥8॥
 
‘Raghunandan! You are the master, protector and chief warrior of this Ikshvaku dynasty as well as of the entire world. Just as Indra is the protector of the gods, in the same way you are the protector of the human world.॥ 8॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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