युञ्जान: स्वानिव प्राणान् प्राणैरिष्टान् सुतानिव।
नित्ययुक्त: सदा रक्षन् सर्वान् विषयवासिन:॥ १२॥
प्राप्नोति शाश्वतीं राम कीर्तिं स बहुवार्षिकीम्।
ब्रह्मण: स्थानमासाद्य तत्र चापि महीयते॥ १३॥
अनुवाद
'श्रीराम! जो राजा अपनी प्रजा की रक्षा के कार्य में तत्पर रहता है और जो अपने राज्य में रहने वाले समस्त लोगों को अपना पुत्र अथवा प्राणों से भी अधिक प्रिय मानकर उनकी सदैव रक्षा करता है, वह बहुत वर्षों तक रहने वाला अक्षय यश प्राप्त करता है और अन्त में ब्रह्मलोक को जाता है और वहाँ भी सम्मानित होता है॥ 12-13॥
'Shri Ram! A king who is engaged in the work of protecting his subjects and who always protects all the people living in his kingdom with care, considering them as his own sons or even dearer than his life, gets everlasting fame that lasts for many years and finally goes to Brahmaloka and is honoured there too.॥ 12-13॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥