| श्रीमद् वाल्मीकि रामायण » काण्ड 3: अरण्य काण्ड » सर्ग 59: श्रीराम और लक्ष्मण की बातचीत » श्लोक 8 |
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| | | | श्लोक 3.59.8  | सा तमार्तस्वरं श्रुत्वा तव स्नेहेन मैथिली।
गच्छ गच्छेति मामाशु रुदती भयविक्लवा॥ ८॥ | | | | | | अनुवाद | | वह वेदनापूर्ण पुकार सुनकर मैथिली आपके स्नेह के कारण भयभीत हो गई और रोते हुए तुरन्त मुझसे बोली, ‘जाओ, जाओ।’॥8॥ | | | | ‘On hearing that cry of pain Maithili became frightened due to her affection for you and while crying said to me immediately, ‘Go, go.’॥ 8॥ | | ✨ ai-generated | | |
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