| श्रीमद् वाल्मीकि रामायण » काण्ड 3: अरण्य काण्ड » सर्ग 59: श्रीराम और लक्ष्मण की बातचीत » श्लोक 7 |
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| | | | श्लोक 3.59.7  | आर्येणेव परिक्रुष्टं लक्ष्मणेति सुविस्वरम्।
परित्राहीति यद्वाक्यं मैथिल्यास्तच्छ्रुतिं गतम्॥ ७॥ | | | | | | अनुवाद | | किसी ने तुम्हारे समान स्वर में जोर से पुकारा, ‘लक्ष्मण! मुझे बचाओ।’ यह वाक्य मिथिलेशकुमारी के कानों तक भी पहुँचा। | | | | ‘Someone called out loudly in a voice similar to yours, 'Laxman! Save me.' This sentence also reached the ears of Mithilesh Kumari. 7. | | ✨ ai-generated | | |
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