श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 3: अरण्य काण्ड  »  सर्ग 59: श्रीराम और लक्ष्मण की बातचीत  »  श्लोक 14-15
 
 
श्लोक  3.59.14-15 
अलं विक्लवतां गन्तुं स्वस्था भव निरुत्सुका।
न चास्ति त्रिषु लोकेषु पुमान् यो राघवं रणे॥ १४॥
जातो वा जायमानो वा संयुगे य: पराजयेत्।
अजेयो राघवो युद्धे देवै: शक्रपुरोगमै:॥ १५॥
 
 
अनुवाद
‘चिंता मत करो, स्वस्थ हो जाओ, चिन्ता छोड़ दो। तीनों लोकों में ऐसा कोई पुरुष न तो उत्पन्न हुआ है, न हो रहा है और न कभी उत्पन्न होगा जो श्री रघुनाथजी को युद्ध में परास्त कर सके। इन्द्र आदि देवता भी श्री रामजी को युद्ध में परास्त नहीं कर सकते।’॥14-15॥
 
‘Do not be anxious, become healthy, stop worrying. In the three worlds, no such person has been born, is not being born and will never be born who can defeat Shri Raghunath in battle. Even gods like Indra cannot defeat Shri Ram in battle.’॥ 14-15॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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