| श्रीमद् वाल्मीकि रामायण » काण्ड 3: अरण्य काण्ड » सर्ग 59: श्रीराम और लक्ष्मण की बातचीत » श्लोक 11 |
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| | | | श्लोक 3.59.11  | विगर्हितं च नीचं च कथमार्योऽभिधास्यति।
त्राहीति वचनं सीते यस्त्रायेत् त्रिदशानपि॥ ११॥ | | | | | | अनुवाद | | 'सीते! मेरा बड़ा भाई, जो देवताओं की भी रक्षा कर सकता है, 'मुझे बचाओ' जैसे निन्दनीय (कायरतापूर्ण) वचन कैसे कह सकता है?॥ 11॥ | | | | 'Sita! How can my elder brother, who can protect even the gods, say such blasphemous (cowardly) words like 'save me'?॥ 11॥ | | ✨ ai-generated | | |
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