श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 3: अरण्य काण्ड  »  सर्ग 58: मार्ग में अनेक प्रकार की आशङ् का करते हुए लक्ष्मण सहित श्रीराम का आश्रम में आना और वहाँ सीता को न पाकर व्यथित होना  »  श्लोक 9
 
 
श्लोक  3.58.9 
यदि जीवति वैदेही गमिष्याम्याश्रमं पुन:।
संवृत्ता यदि वृत्ता सा प्राणांस्त्यक्ष्यामि लक्ष्मण॥ ९॥
 
 
अनुवाद
'लक्ष्मण! यदि विदेहनन्दिनी सीता जीवित होंगी, तभी मैं पुनः आश्रम में पैर रखूँगा। यदि पुण्यवती मैथिली मर गई होगी, तो मैं भी प्राण त्याग दूँगा।॥9॥
 
‘Lakshmana! If Videhanandini Sita is alive, only then will I set foot in the ashram again. If the virtuous Maithili has died, then I too will give up my life.॥ 9॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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