श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 3: अरण्य काण्ड  »  सर्ग 56: सीता का श्रीराम के प्रति अपना अनन्य अनुराग दिखाकर रावण को फटकारना तथा रावण की आज्ञा से राक्षसियों का उन्हें अशोकवाटिका में ले जाकर डराना  »  श्लोक 8
 
 
श्लोक  3.56.8 
असुरैर्वा सुरैर्वा त्वं यद्यवध्योऽसि रावण।
उत्पाद्य सुमहद् वैरं जीवंस्तस्य न मोक्ष्यसे॥ ८॥
 
 
अनुवाद
'रावण! यदि तू दैत्यों या देवताओं से अजेय हो, तो सम्भव है कि वे तुझे मार न सकें; किन्तु भगवान् राम से यह घोर शत्रुता मानकर तू किसी प्रकार भी जीवित नहीं रह सकेगा॥8॥
 
'Ravana! If you are invincible to the demons or the gods, it is possible that they will not be able to kill you; but having sworn this great enmity against Lord Rama, you will not be able to survive in any way. ॥ 8॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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