श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 3: अरण्य काण्ड  »  सर्ग 56: सीता का श्रीराम के प्रति अपना अनन्य अनुराग दिखाकर रावण को फटकारना तथा रावण की आज्ञा से राक्षसियों का उन्हें अशोकवाटिका में ले जाकर डराना  »  श्लोक 6
 
 
श्लोक  3.56.6 
य एते राक्षसा: प्रोक्ता घोररूपा महाबला:।
राघवे निर्विषा: सर्वे सुपर्णे पन्नगा यथा॥ ६॥
 
 
अनुवाद
'तुमने इन भयंकर और बलवान राक्षसों का उल्लेख किया है। श्री राम के पास आते ही इन सबका विष उतर जाएगा, जैसे गरुड़ के पास आते ही सभी सर्प विष के प्रभाव से मुक्त हो जाते हैं।॥6॥
 
'You have mentioned about these fierce and powerful demons. As soon as they come near Shri Ram, the poison of all these will be removed, just like all the snakes become free from the effect of poison when they come near Garuda.॥ 6॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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