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श्लोक 3.55.24  |
न शक्यो वायुराकाशे पाशैर्बद्धुं महाजव:।
दीप्यमानस्य वाप्यग्नेर्ग्रहीतुं विमला: शिखा:॥ २४॥ |
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| अनुवाद |
| आकाश में बड़े वेग से चलने वाली वायु को रस्सियों से नहीं बाँधा जा सकता और न प्रज्वलित अग्नि की शुद्ध ज्वालाओं को हाथ में पकड़ा जा सकता है॥ 24॥ |
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| ‘The wind blowing with great speed in the sky cannot be tied with ropes nor the pure flames of a blazing fire cannot be caught in hands.॥ 24॥ |
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