श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 3: अरण्य काण्ड  »  सर्ग 55: रावण का सीता को अपने अन्तःपुर का दर्शन कराना और अपनी भार्या बन जाने के लिये समझाना  »  श्लोक 17
 
 
श्लोक  3.55.17 
बह्वीनामुत्तमस्त्रीणां मम योऽसौ परिग्रह:।
तासां त्वमीश्वरी सीते मम भार्या भव प्रिये॥ १७॥
 
 
अनुवाद
'सीते! मेरा अन्तःपुर अनेक सुन्दर पत्नियाँ से भरा हुआ है, तुम उन सबकी स्वामिनी बनो - मेरी प्रियतमा! मेरी पत्नी बनो॥17॥
 
'Sita! My harem is filled with many beautiful wives, you become the mistress of all of them - my love! Become my wife.॥ 17॥
 ✨ ai-generated
 
 
  Connect Form
  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
  © 2026 vedamrit.in All Rights Reserved. Developed by acd