श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 3: अरण्य काण्ड  »  सर्ग 55: रावण का सीता को अपने अन्तःपुर का दर्शन कराना और अपनी भार्या बन जाने के लिये समझाना  »  श्लोक 11
 
 
श्लोक  3.55.11 
सुधामणिविचित्राणि भूमिभागानि सर्वश:।
दशग्रीव: स्वभवने प्रादर्शयत मैथिलीम्॥ ११॥
 
 
अनुवाद
उस महल के फर्श लाल चूने से पोते हुए और रत्नजटित थे, जिससे वे सब अद्वितीय लग रहे थे। दशग्रीव ने अपने महल की वे सभी वस्तुएँ मैथिली को दिखाईं। 11.
 
The floors of that palace were paved with red lime and were studded with gems, which made them all look unique. Dashagriva showed all those things of his palace to Maithili. 11.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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