श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 3: अरण्य काण्ड  »  सर्ग 52: रावण द्वारा सीता का अपहरण  »  श्लोक 34
 
 
श्लोक  3.52.34 
उत्पातवाताभिरता नानाद्विजगणायुता:।
मा भैरिति विधूताग्रा व्याजह्रुरिव पादपा:॥ ३४॥
 
 
अनुवाद
रावण के आक्रमण से उत्पन्न प्रलयंकारी वायु के झोंकों से हिलते हुए वृक्षों पर नाना प्रकार के पक्षी शोर मचा रहे थे। उन्हें देखकर ऐसा प्रतीत हो रहा था मानो वृक्ष अपने सिर हिलाकर सीता को संकेत दे रहे हों कि 'डरो मत।'
 
Various kinds of birds were making noise on the trees which were shaking due to the gusts of the destructive wind caused by the attack of Ravana. Looking at them it seemed as if the trees were shaking their heads and signalling to Sita that 'Don't be afraid'.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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