श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 3: अरण्य काण्ड  »  सर्ग 52: रावण द्वारा सीता का अपहरण  »  श्लोक 33
 
 
श्लोक  3.52.33 
तस्या: स्तनान्तराद् भ्रष्टो हारस्ताराधिपद्युति:।
वैदेह्या निपतन् भाति गङ्गेव गगनच्युता॥ ३३॥
 
 
अनुवाद
विदेहनन्दिनी सीता के स्तनों के बीच से चन्द्रमा के समान चमकीला हार फिसलकर गिरता हुआ ऐसा प्रतीत हो रहा था मानो आकाश से गंगा उतर रही हो।
 
The moon-like bright necklace sliding and falling from between the breasts of Videhanandini Sita appeared like the Ganges descending from the sky.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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