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श्लोक  3.52.32 
तस्यास्तान्यग्निवर्णानि भूषणानि महीतले।
सघोषाण्यवशीर्यन्त क्षीणास्तारा इवाम्बरात्॥ ३२॥
 
 
अनुवाद
जानकी के शरीर पर अग्नि के समान चमकने वाले आभूषण थे। उस समय वे एक-एक करके झनझनाते हुए गिरने लगे, मानो आकाश से तारे टूटकर पृथ्वी पर गिर रहे हों।
 
Janaki had ornaments on her body that shone like fire. At that time they began to fall one by one making a tinkling sound, as if stars were breaking from the sky and falling on the earth.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)