श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 3: अरण्य काण्ड  »  सर्ग 51: जटायु तथा रावण का घोर युद्ध और रावण के द्वारा जटायु का वध  »  श्लोक 4
 
 
श्लोक  3.51.4 
ततो नालीकनाराचैस्तीक्ष्णाग्रैश्च विकर्णिभि:।
अभ्यवर्षन्महाघोरैर्गृध्रराजं महाबलम्॥ ४॥
 
 
अनुवाद
रावण ने महाबली गिरिधर राजा नालिका, नाराच तथा तीक्ष्ण विकर्णी अस्त्रों की वर्षा बलवान राजा जटायु पर आरम्भ की॥4॥
 
Ravana started raining down on the mighty King Jatayu of the mighty Giridhra king Naalika, Narach and the sharp tipped Vikarni weapons. 4॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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