Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 ramayan 3.50.8: बुद्धिमान पुरुष को ऐसा कर्म नहीं करना चाहिए जिससे दूसरे लोग उसकी निन्दा करें। जैसे अपनी पत्नी को परपुरुषों के स्पर्श से बचाया जाता है, वैसे ही दूसरों की पत्नियों को भी बचाना चाहिए॥8॥ | ramayan सर्ग 3.50: जटायु का रावण को सीताहरण के दुष्कर्म से निवृत्त होने के लिये समझाना और अन्त में युद्ध के लिये ललकारना । ramayan काण्ड 3: अरण्य काण्ड । श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
बुद्धिमान पुरुष को ऐसा कर्म नहीं करना चाहिए जिससे दूसरे लोग उसकी निन्दा करें। जैसे अपनी पत्नी को परपुरुषों के स्पर्श से बचाया जाता है, वैसे ही दूसरों की पत्नियों को भी बचाना चाहिए॥8॥
‘A wise man should not do such deeds which others may criticise. Just as one's own wife is protected from the touch of other men, similarly the wives of others should also be protected.॥ 8॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥