Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
ramayan 3.50.6-7: 'धर्म पर दृढ़ रहने वाला कोई भी राजा पराई स्त्री को कैसे स्पर्श कर सकता है? हे पराक्रमी रावण! राजाओं की पत्नियों की सभी को विशेष रक्षा करनी चाहिए। पराई स्त्री को स्पर्श करने से जो नीचता प्राप्त होती है, उसे अपने से दूर रखो।'   |   ramayan सर्ग 3.50: जटायु का रावण को सीताहरण के दुष्कर्म से निवृत्त होने के लिये समझाना और अन्त में युद्ध के लिये ललकारना   ।   ramayan काण्ड 3: अरण्य काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 3: अरण्य काण्ड  »  सर्ग 50: जटायु का रावण को सीताहरण के दुष्कर्म से निवृत्त होने के लिये समझाना और अन्त में युद्ध के लिये ललकारना  »  श्लोक 6-7
 
 
श्लोक  3.50.6-7 
कथं राजा स्थितो धर्मे परदारान् परामृशेत्॥ ६॥
रक्षणीया विशेषेण राजदारा महाबल।
निवर्तय गतिं नीचां परदाराभिमर्शनात्॥ ७॥
 
 
अनुवाद
'धर्म पर दृढ़ रहने वाला कोई भी राजा पराई स्त्री को कैसे स्पर्श कर सकता है? हे पराक्रमी रावण! राजाओं की पत्नियों की सभी को विशेष रक्षा करनी चाहिए। पराई स्त्री को स्पर्श करने से जो नीचता प्राप्त होती है, उसे अपने से दूर रखो।'
 
‘How can any king who is steadfast in his Dharma touch an unknown woman? O mighty Ravana! The wives of kings should be specially protected by everyone. Keep away from yourself the lowliness that can be achieved by touching an unknown woman.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)