श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 3: अरण्य काण्ड  »  सर्ग 50: जटायु का रावण को सीताहरण के दुष्कर्म से निवृत्त होने के लिये समझाना और अन्त में युद्ध के लिये ललकारना  »  श्लोक 5-6h
 
 
श्लोक  3.50.5-6h 
तस्यैषा लोकनाथस्य धर्मपत्नी यशस्विनी॥ ५॥
सीता नाम वरारोहा यां त्वं हर्तुमिहेच्छसि।
 
 
अनुवाद
'यह उन्हीं जगदीश्वर श्री राम की महिमामयी पत्नी हैं। इस सुंदर शरीर वाली देवी का नाम सीता है, जिसका तुम अपहरण करना चाहते हो।
 
‘She is the glorious wife of the same Jagadishwar Shri Ram. The name of this beautiful bodied goddess is Sita, whom you want to abduct.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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