vedamrit
Reset
Home
प्रमुख ग्रंथ
भगवद गीता
श्रीमद् रामायण
श्रीमद् भागवतम
श्री महाभारत
श्री रामचरितमानस
श्रीमद् विष्णु पुराण
श्रीचैतन्य भागवत
श्रीचैतन्य चरितामृत
भक्तिरसामृतसिन्धु
वैष्णव भजन, इस्कॉन आरती
Articles
Apps
About
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण
»
काण्ड 3: अरण्य काण्ड
»
सर्ग 50: जटायु का रावण को सीताहरण के दुष्कर्म से निवृत्त होने के लिये समझाना और अन्त में युद्ध के लिये ललकारना
»
श्लोक 4-5h
श्लोक
3.50.4-5h
राजा सर्वस्य लोकस्य महेन्द्रवरुणोपम:॥ ४॥
लोकानां च हिते युक्तो रामो दशरथात्मज:।
अनुवाद
'दशरथनन्दन श्री रामचन्द्रजी सम्पूर्ण जगत के स्वामी हैं, इन्द्र और वरुण के समान पराक्रमी हैं और समस्त लोगों के कल्याण में लगे रहते हैं। 4 1/2॥
'Dasarthanandan Shri Ramchandraji is the master of the entire world, as mighty as Indra and Varun and is engaged in the welfare of all people. 4 1/2॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
© 2023 vedamrit.in - All Rights Reserved. Developed by ACd
Download SongBook App
Install
×