श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 3: अरण्य काण्ड  »  सर्ग 50: जटायु का रावण को सीताहरण के दुष्कर्म से निवृत्त होने के लिये समझाना और अन्त में युद्ध के लिये ललकारना  »  श्लोक 14-15
 
 
श्लोक  3.50.14-15 
यदि शूर्पणखाहेतोर्जनस्थानगत: खर:।
अतिवृत्तो हत: पूर्वं रामेणाक्लिष्टकर्मणा॥ १४॥
अत्र ब्रूहि यथातत्त्वं को रामस्य व्यतिक्रम:।
यस्य त्वं लोकनाथस्य हृत्वा भार्यां गमिष्यसि॥ १५॥
 
 
अनुवाद
'यदि शूर्पणखा का बदला लेने आये अत्याचारी खरका को महाबली राम ने मार डाला, तो मुझे ठीक-ठीक बताइए कि इसमें राम का क्या अपराध है, जिसके कारण आप उन भगवान जगदीश्वर की पत्नी का अपहरण करना चाहते हैं?
 
'If the tyrant Kharaka, who had come to take revenge for Shurpanakha, was killed by the great Rama, then tell me exactly what is the crime of Rama in this, due to which you want to abduct the wife of that Lord Jagadishwar?
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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