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ramayan 3.50.13: जब पराक्रमी और धर्मात्मा श्री रामजी तुम्हारे राज्य या नगर में कोई अपराध नहीं करते, तब तुम उनके प्रति अपराध कैसे कर रहे हो?॥13॥   |   ramayan सर्ग 3.50: जटायु का रावण को सीताहरण के दुष्कर्म से निवृत्त होने के लिये समझाना और अन्त में युद्ध के लिये ललकारना   ।   ramayan काण्ड 3: अरण्य काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 3: अरण्य काण्ड  »  सर्ग 50: जटायु का रावण को सीताहरण के दुष्कर्म से निवृत्त होने के लिये समझाना और अन्त में युद्ध के लिये ललकारना  »  श्लोक 13
 
 
श्लोक  3.50.13 
विषये वा पुरे वा ते यदा रामो महाबल:।
नापराध्यति धर्मात्मा कथं तस्यापराध्यसि॥ १३॥
 
 
अनुवाद
जब पराक्रमी और धर्मात्मा श्री रामजी तुम्हारे राज्य या नगर में कोई अपराध नहीं करते, तब तुम उनके प्रति अपराध कैसे कर रहे हो?॥13॥
 
'When the mighty and righteous Sri Ram does not commit any crime in your kingdom or city, then how are you committing a crime against him?॥ 13॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)